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Covid-19 यूपी में सरकार कह रही हालात ठीक हैं और मंत्री कह रहे कुछ भी ठीक नहीं

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यूपी में सरकार कह रही हालात ठीक हैं: नमस्कार, आज हम यह समझेंगे की यूपी में आखिर कोरोना से हालात कैसे हैं, सरकार का क्या कहना है और जमीनी हकीकत क्या है ? इसका मूल्यांकन करने का मकसद सिर्फ इतना है की आप जागरूक रहें और स्तिथि के अनुसार ही काम करें खुद भी बचें और अपने परिवार को भी बचाएं।

यूपी में सरकार कह रही हालात ठीक हैं

यूपी में सरकार कह रही हालात ठीक हैं

हम सभी यह तो जानते हैं की फिलहाल यूपी में सरकार कोरोना ने निपटने के लिए कई नियमों को लागू कर चुकी है जैसे नाईट कर्फ्यू, वीकेंड लॉकडाउन, अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन और जरुरी दवाइयों के इन्तिजाम किये हैं। इसे हम कह सकते हैं की सरकार द्वारा उठाये गए यह जरुरी कदम हैं, जिससे लोगों की जान बचायी जा सके।

यूपी सरकार ने हाल ही में दावा किया है कि बीते तीन दिनों में कोरोना के मरीजों में काफी कमी आयी है अर्थात बहुत कम लोग ही Covid-19 से संक्रमित हुए है जोकि बहुत ही अच्छी बात है। क्योंकि अगर मरीज कम होंगे तभी इनका अच्छी तरह से इलाज हो सकेगा और सभी सुविधाएं सुचारु रूप से चल सकेंगी।

असलियत, यूपी में कोरोना के मरीजों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिम्मेदार कौन ? फिलहाल यूपी में कोरोना तेजी से बढ़ रहा है लखनऊ, मोहनलाल गंज और मेरठ में फिलहाल स्तिथि काबू में नजर आती नहीं दिख रही है।

यूपी में सरकार कह रही हालात ठीक हैं और मंत्री कह रहे कुछ भी ठीक नहीं

अब यूपी सरकार के दावों के उलट उनके ही मंत्री का कहना है की कुछ भी ठीक नहीं है। ऐसा क्यों, यूपी लेबर वेलफेयर काउन्सिल के अध्यक्ष, राज्य मंत्री सुनील भराला और लखनऊ की मोहनलालगंज सीट से बीजेपी सांसद कौशल किशोर ने पत्र लिखकर सीएम योगी जी से कहा है-

“कोविड मामलों में गंभीर वृद्धि के बावजूद मेरठ और लखनऊ में सरकार के अस्पतालों की अपर्याप्त व्यवस्था और हैंडलिंग को लेकर चिंता जताई है। योगी जी से अनुरोध किया है कि कोविड रोगियों के लाभ के लिए व्यक्तिगत रूप से वह हस्तक्छेप करें।

ऐसा मंत्रियों का क्यों कहना है

यूपी में एक नियम बहुत ही पुराना है, अक्सर यह देखा गया है की जब कोई मुसीबत होती है तब या तो जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं होते या तो छुट्टी पर चले जाते हैं। मामला कुछ इस प्रकार है कि हाल ही में कौशल किशोर ने लखनऊ के केजीएमयू और बलरामपुर अस्पतालों में अधिकारीयों से बात की उनका कहना है की अस्पताल में जरुरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।

अस्पताल के अधिकारीयों का आरोप है कि जो सुविधाएं बेड पर होनी चाहिए वह है ही नहीं, अधिकांश बेड खाली पड़े हुए हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी या तो छुट्टी पर हैं या उग्र महामारी से पूरी तरह से बेखबर हैं।

अगर अस्पतालों को जरुरी चीजें दी ही नहीं जाएंगी तो अस्पताल कहाँ से लाएगा, अब जिन लोगों की जिम्मेदारी है उन चीजों को मुहैया करवाने की वो छुट्टी पर हैं। सरकार को चाहिए की ऐसे अधिकारीयों पर सख्त करवाई करे जिससे अस्पतालों में जरुरी चीजें मुहैया करवाई जा सकें और लोगों की जानें बचायी जा सकें।

सारांश

यूपी में सरकरी आंकड़े कुछ कह रहे हैं और हकीकत कुछ और है, ऐसे में हम सभी के लिए यह जरुरी है की हम सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क लगाना और हाँथ धोना जैसे  परहेज करें, जिससे हम खुद भी कोरोना से बच सकें और अपने परिवार जनों को भी कोरोना से बचा सकें।

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