हर 100 साल में आती है कोरोना जैसी महामारी, 400 वर्षों से लगातार

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100 साल में आती है कोरोना जैसी महामारी: नमस्कार आज के इस पोस्ट में हम 400 वर्षों से आने वाली महामारी का विश्लेषण करेंगे और जानेंगे की क्या हर 100 साल में आती है कोरोना जैसी महामारी और अभी तक इन महामारियों से कितना नुकसान पहले हुआ है और आगे  क्या हो सकता है।

100 साल में आती है कोरोना जैसी महामारी

100 साल में आती है कोरोना जैसी महामारी

हम सभी यह तो जानते हैं की वर्ष 2020 के शुरू होते ही भारत में कोरोना वायरस (Covid-19) की वजह से अभी तक लाखों लोग संक्रमित हो चुके हैं और हजारों लोगों की जान जा चुकी है। इसके साथ ही तथ्य यह भी कहते हैं की 400 वर्षों से लगातार भारत वा अन्य देशों में हर 100 वर्ष में कोरोना जैसी महामारी आती रही है, जिसके परिणाम भावय रहे हैं।

इन तथ्यों में कितनी सच्चाई है और क्या यह बात सही है की 400 वर्षों से लगातार ऐसी महामारी आ रही है। इस तथ्य की पुष्टि करने के लिए आज हम 400 वर्षों में कब और कौन सी महामारी आयी और उससे कितना नुकसान हुआ के में जानेंगे।

400 वर्षों में आने वाली महामारियों का विश्लेषण

अब अगर हमें 400  वर्षों का विश्लेषण करना है तो हम 2020 से लेकर वर्ष 1720 तक का पूरा विश्लेषण करेंगे जिससे पता चल सकें की इन 400 वर्षों में कब और कहाँ से कौन सी महामारी ने जन्म लिया है और किन-किन देशों ने इस महामारी का सामना किया है।

प्लेग (1720)

वर्ष 1720 से इन 400 वर्षों की शुरुवात होती है, जिसमें प्लेग महामारी ने शुरुवात की थी। इस महामारी की शुरवात फ़्रांस के एक छोटे से शहर मॉर्साइल से हुई थी। तथ्यों के अनुसार यह महामारी चूहों के कारण फैली थी। इस महामारी से करीब 1 लाख से ज्यादा लोगों की जानें गयी थी, बताया जाता है की जब यह महामारी फैली तो इनसे कुछ ही  महीनों में 50 हजार लोगों को अपनी चपेट में लिया था जिससे उनकी मौत हो गयी थी।

इसके बाद बाकी के 50 हरज लोग अगले दो सालों में मारे गए। उस वक़्त लोगों को इस महामारी के बारे में ना ही जानकारी थी और ना ही ऐसे साधन जिससे लोगों को महामारी के बारे में बताया जा सकता था जिसके कारण यह महामारी फैलती गयी और धीरे-धीरे कई प्रांतो और फिर देशों तक पहुंच गयी।

जिसकी वजह से माल्टा में 1679, विएना में 76,000 प्राग में 83 हजार लोगों की जान चली गयी। इस महामारी का असर भारत में भी देखने को मिला था जोकि पाली से मेवाड़ पहुंची और फिर मेवाड़ में इस महामारी ने इतना तांडव मचाया की लोग डरने लगे। हालत यह थी कि लोग अपना इलाज कराने के लिए अस्पताल तक नहीं पहुंच पा रहे थे और रस्ते में ही उनकी मृत्यु हो जाती थी।

कॉलेरा (1820)

इसके ठीक सौ वर्षों बाद 1820 में कॉलेरा (हैजा) महामारी का जन्म हुआ जोकि एशियाई देशों में फैली जैसे की भारत, जापान, बैंकॉक, मनीला, ओमान, चीन, सीरिया इत्यादि। यह महामारी इतनी विनाशक थी कि सिर्फ जावा में 1 लाख लोगों की जान चली गयी। उस वक़्त इस महामारी से सबसे ज्यादा मौतें थाईलैंड, इंडोनेशिया और फिलीपींस में हुई थी।

स्पैनिश फ्लू (1920)

ठीक सौ वर्षों बाद अर्थात 1920 में स्पैनिश फ्लू का जन्म हुआ। जिसकी शुरुवात अमेरिका से हुई थी, इस महामारी से पूरी दुनिया में 1.70 करोड़ से 5 करोड़ लोगों की जान चली गयी थी। इस महामारी के फैलने का मुख्य कारण विश्व युद्ध हो सकता है क्योंकि वर्ष 1920 में विश्व युद्ध हो रहा था और इस विश्वयुद्ध में अमेरिका भी शामिल था।

जिसकी वजह से स्पैनिश फ्लू अमेरिकी सैनिकों से यूरोप में फैला था। जब यह महामारी भारत में आयी तो इसे बॉम्बे फीवर के नाम से जाना गया। इस अनुमान के मुताबिक भारत में इस महामारी से कुल 1 से 2 करोड़ लोगों की जानें चली गयी थी।

कोरोना वायरस (2020)

वर्ष 2020 के शुरुवात से ही भारत में कोरोना वायरस ने हाहाकार मचा रखा है। माना जाता है इस वायरस की शुरुवात चीन के वुहान शहर से हुई थी। जोकि इंसानों से इंसानों में फैलती है। अब तक विश्व में इस महामारी से 6 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 53 लाख  से अधिक लोग संक्रमित हैं।

केवल भारत में इस वायरस की वजह से अभी तक 28 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 11 लाख से अधिक लोग संक्रमित हैं। अभी तक दुनिया के कुल 188 देशों में यह वायरस फैला है। सबसे ख़राब स्तिथि अमेरिका की है क्योंकि वहां इस वायरस से एक ही दिन में मरने वालों की संख्या 1169 थी और अभी तक 6000 से ज्यादा लोगों की मौतें हो चुकी है।

In Conclusion

इन आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर यह बात सिद्ध हो चुकी है कि 400 वर्षों से लगातार हर 100 वर्ष में ऐसी महामारी आती रही है, जिससे लाखों-करोड़ों लोगों ने अपनी जान गवाई है। हालांकि एक मुख्य बात सामने आयी की जब भी इस प्रकार की महामारी आती है तो Social Distancing और Home Isolation जैसे तरीके ही कारगर सिद्ध हुए हैं।

जिससे लोगों को बचाया जा सकता है, इस पूरे विश्लेषण का तात्पर्य वा अर्थ यही निकलता है की अगर आप खुद को इस महामारी से बचाना चाहते हैं तो social distancing का पालन करें और बिना काम के घर से बहार ना निकलें।

इसके साथ ही 1720 से वर्ष 2020 में बहुत अंतर है आज विज्ञान ने खूब तरक्की कर ली है जिसकी वजह से आज ज्यादातर देशों में इस महामारी से बचने के लिए Advertisment के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है और साथ ही टीका भी बनाया जा रहा है, जिससे जल्दी से जल्दी लोगों की जान बचायी जा सके और इस महामारी को रोका जा सके।

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